वादे भरे विकासी बादल
है घनघोर सियासी बादल।
कहीं मसर्रत दे जायेंगे,
देंगें कहीं उदासी बादल।
कहीं अयोध्या सी बेचैनी
और कहीं पर काशी बादल।
वायुयान से खेल रहे हैं
नभ में घिरे कपासी बादल ।
बूंद मिलन का इक जरिया है
धरती छुए अकासी बादल।
मन में जब से तुम आये हो
आँखों खिले पलाशी बादल।
तुझसे जग मीठा नग़मा है
तुझ बिन लगे मिरासी बादल।।
डॉ. अनु सपन
( सर्व अधिकार सुरक्षित)
