वो होतीं है ना
कुछ लड़कियां,
जिन्हें पंक्ति के अंत मे दिखते है
प्रश्नचिन्ह ना की पूर्णविराम
वो
जिन्हें संस्कारी और मूक बधिर
होने में अंतर मालूम
होता है
वो जो
धार्मिक नहीं आध्यात्मिक
होने में विश्वास रखतीं हैं
जिन्हें भीड़ नहीं
चन्द अपनो की
तलाश होती है
जो किसी भी कार्य के
अंत का सोच कर
आरम्भ करने से
पीछे नहीं हटतीं
जो सही दूसरो का
और गलती अपनो
की भी बताती हैं
हाँ वो ही लड़कियाँ ,
हकदार है ये बताने को
कि लड़कियाँ कैसी होनी चाहिए
© कात्यायनी गौड़
