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Saturday, August 4, 2018

किरदार......श्यामल सुमन

बाँटी हो जिसने तीरगी उसकी है बन्दगी।
हर रोज नयी बात सिखाती है ज़िन्दगी।।

क्या फ़र्क रहनुमा और क़ातिल में है यारो।
हो सामने दोनों तो लजाती है ज़िन्दगी।।

लो छिन गए खिलौने बचपन भी लुट गया।
यों बोझ किताबों की दबाती है ज़िन्दगी।।

है वोट अपनी लाठी क्यों भैंस है उनकी।
क्या चाल सियासत की पढ़ाती है ज़िन्दगी।।

गिनती में सिमटी औरत पर होश है किसे।
महिला दिवस मना के बढ़ाती है ज़िन्दगी।।

किरदार चौथे खम्भे का हाथी के दाँत सा।
क्यों असलियत छुपा के दिखाती है ज़िन्दगी।।

देखो सुमन की ख़ुदकुशी टूटा जो डाल से।
रंगीनियाँ काग़ज़ की सजाती है ज़िन्दगी।।
-श्यामल सुमन

Sunday, July 29, 2018

आदत..........श्यामल सुमन

मेरी यही इबादत है।
सच कहने की आदत है।।

मुश्क़िल होता सच सहना तो।
कहते इसे बग़ावत है।।

बिना बुलाये घर आ जाते।
कितनी बड़ी इनायत है।

कभी ज़रूरत पर ना आते।
इसकी मुझे शि्क़ायत है।।

मीठी बातों में भरमाना।
इनकी यही शराफ़त है।।

दर्पण दिखलाया तो कहते।
देखो किया शरारत है।।

झूठ कभी दर्पण न बोले।
बहुत बड़ी ये आफत है।।

ऐसा सच स्वीकार किया तो।
मेरे दिल में राहत है।।

रोज विचारों से टकराकर।
झुका है जो भी आहत है।।

सत्य बने आभूषण जग का।
यही सुमन की चाहत है।।
-श्यामल सुमन

Monday, June 12, 2017

सच में है दीन जिन्दगी....श्यामल सुमन

जो दिखती रंगीन जिन्दगी
वो सच में है दीन जिन्दगी

बचपन, यौवन और बुढ़ापा
होती सबकी तीन जिन्दगी

यौवन मीठा बोल सके तो
नहीं बुढ़ापा हीन जिन्दगी

जीते जो उलझन से लड़ के
उसकी है तल्लीन जिन्दगी

वही छिड़कते नमक जले पर
जिसकी है नमकीन जिन्दगी

दिल से हाथ मिले आपस में
होगी क्यों गमगीन जिन्दगी

जो करता है प्यार सुमन से
वो जीता शौकीन जिन्दगी
-श्यामल सुमन....फेसबुक से

Wednesday, September 21, 2016

अपनी पहचान ढूँढता हूँ.......श्यामल सुमन



 तेरे प्यार में अभी तक मैं जहान ढूँढता हूँ
दीदार हो सका न क्यूँ निशान ढूँढता हूँ

जब मतलबी ये दुनिया रिश्तों से क्या है मतलब
इन मतलबों से हटकर इन्सान ढूँढता हूँ

खोया है इश्क़ में सब आगे है और खोना
ख़ुद को मिटाने वाला नादान ढूँढता हूँ

एहसास उनका सच्चा गिरकर जो सम्भलते जो
अनुभूति ऐसी अपनी पहचान ढूँढता हूँ

कभी घर था एक अपना जो मकान बन गया है
फिर से सुमन के घर में मुस्कान ढूँढता हूँ
-श्यामल सुमन
shyamalsuman@yahoo.co.in