Showing posts with label अभिव्यक्ति. Show all posts
Showing posts with label अभिव्यक्ति. Show all posts

Saturday, August 29, 2020

खुद पर यकीन करो ..मंजू मिश्रा


उठो
सीधी खड़ी  हो 
और खुद पर यकीन करो 
तुम किसी से कम नहीं हो 
तुम झूठे पौरुष के दंभ का शिकार 
जानवरों का शिकार तो
बिलकुल नहीं बनोगी
तुम जिंदगी में 
किसी से नहीं डरोगी ....
*** 
अपने
पैरों के नीचे की जमीन 
और सर के ऊपर का आसमान 
तुम खुद तलाश करोगी 
तुम्हे अपनी जिंदगी से जो चाहिए
उसके होने न होने की राह भी 
तुम खुद तय करोगी
तुम जिंदगी में 
किसी से नहीं डरोगी ....
***
रिश्तों का मोल 
तुम खूब पहचानती हो 
इनको निभाने का सलीका भी 
खूब जानती हो लेकिन 
तुम कमजोर नहीं हो
अपने स्वाभिमान की कीमत पर 
तुम कुछ नहीं सहोगी  
तुम जिंदगी में  
किसी से नहीं डरोगी ....
***
-मंजू मिश्रा
मूल रचना


Sunday, November 11, 2018

अँधेरे अँधेरों मे खो गए !!...मंजू मिश्रा

मुट्ठी भर दिए
मील भर अँधेरों को
चुनौती देते हैं
शान से हँसते हैं
और अँधेरे
मन मसोस कर रह जाते हैं
-:-
यही तो है
असली ताकत
उजाले की
जब नन्ही सी रेख
चीर देती है सीना अँधेरे का
और अँधेरे देखते रह जाते हैं
-:-
अँधेरों का हठ
तोड़ने की ठान ली जब
उस नन्हे से माटी के दिए ने
हवाएँ अाँधियाँ बन कर खूब चलीं
मगर वो जाँबाज डरा नहीं डटा रहा
और फिर उजाले के जशन में
अँधेरे अँधेरों मे खो गए !!
-मंजू मिश्रा