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Thursday, January 14, 2021

बदलाव..... संजय भास्कर

घर से दफ्तर के लिए
निकलते समय रोज छूट
जाता है मेरा लांच बॉक्स और साथ ही
रह जाती है मेरी घड़ी
ये रोज होता हो मेरे साथ और
मुझे लौटना पड़ता है उस गली के
मोड़ से
कई वर्षो से ये आदत नहीं बदल पाया मैं
पर अब तक मैं यह नहीं
समझ पाया
जो कुछ वर्षों से नहीं हो पाया
वह कुछ महीनो में कैसे हो पायेगा
अखबार के माध्यम से की गई
तमाम घोषणाएं
समय बम की तरह लगती है
जो अगर नहीं पूरी हो पाई
तो एक बड़े धमाके के साथ
बिखर जायेगा सबकुछ......!!
- संजय भास्कर

Saturday, June 20, 2020

तभी तो ख़ामोश रहता है आईना......संजय भास्कर



अक्सर हमेशा कुछ कहता है आईना

तभी तो हमेशा ख़ामोश रहता है आईना  !!


जो बातें छिपी है दिल के अन्दर 

उसे बाहर लाने में मददगार होता है आईना  !!


दीवानगी में दीवाने लोगो का दुःख

देखकर चुपचाप सहता है आईना  !!


जब कभी अकेले होता हूँ तन्हा

तन्हाई का सबसे बड़ा साथी है आईना !!


कहते है आईना दिखाता है जाल भ्रम का 

पर बार -बार टूट कर भी धड़कता है आईना !!


-- संजय भास्कर 

Tuesday, January 7, 2020

देश सबका है....संजय भास्कर

 ( चित्र गूगल से साभार  )

बीज बो गए विषमता के 
आज यहाँ सापों की खेती उग आई है
क्यारी को फिर से सँवारो
बीज नए डालो प्यार के हमदर्दी के,
मेड़ें मत बाँधो
लकीर मत बनाओ अपनों के 
बीच में 
मत करो देशका विभाजन 
जातिवाद और धरम के नाम पर 
क्योकि धरती सबकी है 
देश सबका है !!

- संजय भास्कर   

Saturday, November 23, 2019

इश्‍तेहार ....संजय भास्कर


इश्‍तेहार
चाहे किसी कंपनी का हो या
किसी स्कूल,दुकान का
उसे पढ़ना चाहिए
क्योंकि उसे पढ़ने में कोई ड़र नहीं
समय ही ऐसा हो गया है
सब काम ही इश्‍तेहारो से होते है
नई दूकान बनाओ
तो इश्‍तेहार
अस्पताल बनाओ
तो इश्‍तेहार
इश्‍तेहार जिसमे होती है
कुछ सूचनाएं कुछ सन्देश
कुछ आकड़े
कुछ वादे
जिसे खुद भी पढ़ो दूसरो को भी
सुनाओ और हमारी
सेवाओं व् वस्तुओ का फायदा उठाओ
पर इश्‍तेहार के चक्कर में
ठगे जाते है भोले भाले गरीब लोग
अक्सर
इसलिए इश्‍तेहार पढ़े जरूर
पर फैसला ले सोच समझकर
क्योंकि इश्‍तेहार का काम है
सिर्फ सूचना पहुँचाना !!



Wednesday, September 25, 2019

माँ की जलती हथेलिया....संजय भास्कर


वर्षो से जलती रही हथेलियाँ
माँ की 
सेंकते- सेंकते रोटियां 
मेरे पहले स्कूल से लेकर आखरी कॉलेज तक  
सब याद है मुझे आज तक 
बड़ी सी नौकरी और मिल गया 
बड़ा सा घर 
जिसे पाने के लिए सारी -२ रात लिखे पन्ने 
अनजानी काली स्याही से 
पर सब कुछ होने पर 
नहीं भूलती
माँ की जलती हथेलियाँ....!!

- संजय भास्कर 

Tuesday, September 3, 2019

3 सितम्बर जन्मदिन पर आशीर्वाद चाहिए !

आदरणीय गुरुजनों और मित्रो को मेरा प्यार भरा नमस्कार 3 सितम्बर आज मेरा जन्मदिन है 
जन्मदिन के इस अवसर पर आप सभी का 
प्रेम और आशीर्वाद चाहिए !!

इस अवसर पर एक छोटी सी कविता 
बहन पूजा की ओर से  !!
जन्मदिन की बधाईयाँ ढेर सारी हार्दिक बधाईयाँ
 देना चाहती हूँ !
 जो
जो कुछ अलग हो 
  कुछ खास हो
  कुछ जुदा हो
 और हमेशा आपके साथ हो
पर क्या 
 जो एक छोटी बहन 
अपने बड़े भाई को दे सके 
 कुछ मिलता ही नहीं 
 कोई नज्म नहीं
  कोई कविता नहीं
 कोई गिफ्ट नहीं
इसलिए
 सिर्फ और सिर्फ
बधाईयाँ
 ढेर सारी बधाईयाँ..........!!!

- संजय भास्कर 

Saturday, August 24, 2019

व्यस्तताओं के जाल में...संजय भास्कर



अक्सर हो जाती है 
इकट्ठी
ढेर सारी व्यस्तताएँ
और आदमी 
फस जाता है इन व्यस्तताओं 
के जाल में  
पर आदमी सोचता जरूर 
है की छोड़ आएँ
व्यस्तताएँ कोसो दूर अपने से 
पर जब हम निकलते 
व्यस्तताओं को 
दूर करने के लिए 
तब लाख कोशिशों 
के बाद पीछा नहीं छोड़ती 
ये व्यस्तताएँ हमारा  
और हमे 
मजबूरन जीना पड़ता है 
ये व्यस्तताओं भरा जीवन 
और लड़ना पड़ता है अपने आपसे 
और व्यस्तताओं से 
तब इन व्यस्तताओं से बचने के बहाने
तलाशता आदमी 
हमेशा व्यस्त नजर आता है  !!

- संजय भास्कर 

Saturday, August 3, 2019

मैं अकेला चलता हूँ .....संजय भास्कर


मैं अकेला चलता हूँ 
चाहे कोई साथ चले 
या न चले 
मैं अकेले ही खुश हूँ 
कोई साथ हो या न हो 
पर मेरी छाया
हमेशा मेरे साथ होती है !
जो हमेशा मेरे पीछे- २  
अक्सर मेरा पीछा करती है 
घर हो या बाज़ार
हमेशा मेरे साथ ही रहती है 
मेरी छाया से ही मुझे हौसला मिलता है !
क्योंकि नाते रिश्तेदार तो 
समय के साथ ही चलते है 
पर धूप हो या छाँव 
छाया हमेशा साथ रहती है 
और मुझे अकेलेपन का अहसास नहीं होने देती 
इसलिए मैं अकेला ही चलता हूँ ......!!

  
- संजय भास्कर  

Friday, July 12, 2019

कुछ रिश्ते अनाम होते है ....संजय भास्कर


कुछ रिश्ते अनाम होते है 
पर वो रिश्ते
दिल के करीब होते है 
अनाम होने पर भी रिश्ते 
कायम रहते है !
पर जब भी उन्हें नाम देने 
की कोशिश की जाती है !
तो जाने क्‍यूँ 
वो रिश्ते लड़खड़ाने लगते है 
नाम से रिश्ते तो बन्ध जाते है !
पर बेनाम आगे बढ़ते जाते है 
न कोई बंधन और न ही कोई सहारा 
सच्ची मुस्कान लिए होते है 
अनाम रिश्ते !
सभी बन्धनों से मुक्त ,
बिना किसी सहारे के लम्बी दूरी तक 
साथ निभाते है अनाम रिश्ते ! 
हमेशा दिल के पास होते है 
ये अनाम रिश्‍ते 
अपनेपन का नाम साथ लेकर ही
बस खास होते है !!
- संजय भास्कर

Thursday, May 23, 2019

फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता हुआ शहर:) .....संजय भास्कर

फ्लाईओवर पर तेजी से दौड़ता 
हुआ शहर
यह वह शहर नहीं रहा अब
जिस शहर में 
'' मैं कई वर्षो पहले आया था ''
अब तो यह शहर हर समय भागता 
नजर आता है !
कच्ची सड़के ,कच्चे मकानों
और साधन के नाम पर
पर साईकल पर चलने 
वाले लोग 
रहते है अब आलिशान घरों में
और दौड़ते है तेजी से कारों में
नए आसमान की तलाश में
फ्लाईओवर के आर- पार
मोटरसाइकल कारों पर
तेजी से दौड़ता 
हुआ शहर
पहुच गया है नई सदी में
मोबाइल और इन्टरनेट के जमाने में
बहुत तेजी से बदल रहा है
..........छोटा सा शहर  !!!

-- संजय भास्कर 

Monday, January 14, 2019

वो आकर्षण.......संजय भास्कर

कॉलेज को छोड़े करीब 
नौ साल बीत गये !
मगर आज उसे जब नौ साल बाद 
देखा तो 
देखता ही रह गया !
वो आकर्षण जिसे देख मैं 
हमेशा उसकी और
खिचा चला जाता था !
आज वो पहले से भी ज्यादा 
खूबसूरत लग रही थी 
पर मुझे विश्वास नहीं 
हो रहा था !
की वो मुझे देखते ही 
पहचान लेगी !
पर आज कई सालो बाद 
उसे देखना 
बेहद आत्मीय और आकर्षण लगा 
मेरी आत्मा के सबसे करीब ........!!
- संजय भास्कर