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Sunday, May 12, 2019

मातृदिवस पर दो कविताएँ

तुमसा कोई नहीं है मां
मेरे हर दुःख-दर्द की
दवा है मेरी मां,
मुसीबतों के समय
मख़मली ढाल है मेरी मां,
अपनी चमड़ी के जूते बनाकर
पहनाऊं वह भी कम है, मां,
इस जहां में तो क्या,
किसी भी जहां में
तुमसा कोई नहीं है मां
-विनीता शर्मा


इंद्रधनुष की रंगत मां

प्यार की परिभाषा है मां
जीने की अभिलाषा है मां
हृदय में जिसके सार छुपा
शब्दों में छिपी भाषा है मां
इंद्रधनुष की रंगत है मां
संतों की संगत है मां
देवी रूप बसा हो जिसमें
ज़मीं पर ऐसी जन्नत है मां
-मधु टांक