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Sunday, February 2, 2020

कोई यहॉ हिन्दु कोई मुसलमान रह गया....अमित चंद्रा


दिल में तेरी यादों का तूफान रह गया 
बस्तियॉ लुट गई सारी खाली मकान रह गया। 


जुल्म और नफरत से भर गई 

दुनिया इन्सान अब कहॉ इन्सान रह गया। 



ताउम्र ख्वाहिशों को ही जीता रहा मगर 

दिल में बाकी फिर भी कुछ अरमान रह गया।

इन्सान अब रहा नहीं तेरी दुनिया में ऐ खुदा 
कोई यहॉ हिन्दु कोई मुसलमान रह गया।