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Thursday, October 2, 2014
Sunday, September 1, 2013
धरती पर पहले पहल....विपिन चौधरी
एक तरफ की रोटी को
थोड़ा कच्चा रख
दूसरी तरफ को
थोड़ा ज्यादा पकाकर फूली हुई
रोटी को बना कर एक स्त्री
अनजानें में ही संसार की
पहली गृहस्थन बन गई होगी
थोड़ा कच्चा रख
दूसरी तरफ को
थोड़ा ज्यादा पकाकर फूली हुई
रोटी को बना कर एक स्त्री
अनजानें में ही संसार की
पहली गृहस्थन बन गई होगी
जिस प्राणी की आँखों में पहले-पहल नग्न शिला देख
गुलाबी डोरों नें जन्म लिया होगा
उसे पुरुष का नाम दे दिया होगा
जो अपने मन - भीतर उठती सीली भाप
में यदा-कदा सुलग उठा हो
उसने ही आगे चल कर
प्रेम की राह पकड़ ली होगी
धरती ने
मनुष्यो की इन कोमल गतिविधियों पर खुश होते हुए
अपने सभी बन्द किनारे खोल दिये होंगें
फिर एक दिन जब पुरुष,
स्त्री को चारदिवारी भीतर रहने को कह
अपने लिये यायावरी निश्चित कर
बाहर खुले आसमान में निकल आया होगा
तब धरती चाह कर भी अपने खुले हुए
किनारों को समेट ना पाई होगी....
--विपिन चौधरी
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