पुकारती है ख़ामोशी मेरी फुगां की तरह
निग़ाहें कहती है सब राज-ए-दिल जबां की तरह
जला के दाग-ए-मोहब्बत ने दिल को ख़ाक किया
बहार आई मेरे बाग में खिज़ां की तरह
तलाश-ए-यार में छोड़ी न सरज़मी कोई,
हमारे पांवों में चक्कर है आसमां की तरह
छुड़ा दे कैद से ऐ कैद हम असीरों को
लगा दे आग चमन में भी आशियां की तरह
हम अपने ज़ोफ़ के सदके बिठा दिया ऐसा
हिले ना दर से तेरे संग-ए-आसतां की तरह
...............................
फुगां- दुख में रोना, असीरों- कैदी,
ज़ोफ़- कमजोरी, संग-ए-आसतां- दहलीज
निग़ाहें कहती है सब राज-ए-दिल जबां की तरह
जला के दाग-ए-मोहब्बत ने दिल को ख़ाक किया
बहार आई मेरे बाग में खिज़ां की तरह
तलाश-ए-यार में छोड़ी न सरज़मी कोई,
हमारे पांवों में चक्कर है आसमां की तरह
छुड़ा दे कैद से ऐ कैद हम असीरों को
लगा दे आग चमन में भी आशियां की तरह
हम अपने ज़ोफ़ के सदके बिठा दिया ऐसा
हिले ना दर से तेरे संग-ए-आसतां की तरह
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फुगां- दुख में रोना, असीरों- कैदी,
ज़ोफ़- कमजोरी, संग-ए-आसतां- दहलीज
-दाग दहलवी
जन्मः 25 मई, 1831, दिल्ली
अवसानः 17 मार्च, 1905, हैदराबाद
जन्मः 25 मई, 1831, दिल्ली
अवसानः 17 मार्च, 1905, हैदराबाद
