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Saturday, October 24, 2020

एक श्रृंगारिक हिंदी गज़ल ...माण्डवी


याद आते बहुत पर तुम आते नहीं,
क्या कभी हम तुम्हें याद आते नहीं।

याद में आपके दिल परेशान है,

आप तो अपना वादा निभाते नहीं।

याद आते रहे तुमको हम भी बहुत,

क्यों कभी तुम हमें यह बताते नहीं।

जान से भी वो ज्यादा मुझे चाहते,
प्यार अपना मगर वो जताते नहीं।

आपके प्यार में हम दीवाने हुए,
जानते तो हैं पर बोल पाते नहीं।
-माण्डवी




Wednesday, October 21, 2020

#दाग अच्छे है ...नीलम गुप्ता


 #दाग अच्छे है
दाग पर ना जा
दाग है तभी हम सच्चे है 
दाग बहुत अच्छे है
सफ़ेद कुर्ती पर लगा दाग
क्यों आंखों को नहीं भाता
इस दाग से ही तो
रचता संसार सारा
क्यों शराब खुले में
पैड काली पन्नी 
में लाए जाते
उन पांच दिनों की कीमत
क्यों लोग समझ ना पाते
रचा ब्रह्मांड उन दागों से ही
फिर क्यों उन पांच दिनों की
कोई बात नहीं करता
उन दिनों के दर्द को
कोई नहीं समझता
क्यों छुपा छुपा कर 
क्यों बचा बचा कर
इस तस्वीर में रंग भरते है
क्यों नहीं कहते
ये दाग बहुत ही अच्छे है

स्वरचित

-नीलम गुप्ता

Thursday, October 15, 2020

नीला आसमान ...सरिता सिंह


ये जो विस्तृत नीला
आसमान देख रहे हो न?
ये मेरा है,
इसलिए नहीं कि
मैंने इसे जीता है,
इसलिए कि मैं
उड़ने का माद्दा रखती हूँ,
यही बात तुम्हें
हमेशा से चुभती रही है,
जिसकी खुन्नस 
निकालने के लिए
तुम मेरी 
उड़ान रोकने की 
कोशिशें करते रहते हो,
नाकाम कोशिशें,
कभी मेरे 
पंख कतरते हो,
कभी मुझे पिंजड़ों में
बन्द करते हो,
खुद को मनाते हो बार बार कि
अब ये छटपटाएंगी,
गिड़गिड़ाएंगी,
खुश होते हो
कतरे हुए पंख देखकर,
उनसे निकलने वाली
लहू की गंध सूंघकर,
पर तुम भ्रम में हो...
जरा अपनी जमीन पर गड़ी
नजरें उठाकर
आसमान की ओर देखो,
मैं अपने नए पंख फैलाए
आसमान की ऊंचाई
और 
तुम्हारी नीचता भी नाप रही हूँ
एक साथ,
हाँ...अब भी ये आसमान मेरा है!
-सरिता सिंह