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Wednesday, January 8, 2020

लगी है चोट जो दिल पर ,,,गुलाब खण्डेलवाल

लगी है चोट जो दिल पर बता नहीं सकते
ये वो कसक है जो कहकर सुना नहीं सकते

तुम्हारे प्यार को भूलें तो भूल जायें हम
तुम्हारी याद को दिल से भुला नहीं सकते

उन्होंने दम में किया ख़त्म ज़िन्दगी का सफ़र
जो कह रहे थे कि दो पग भी जा नहीं सकते

तुम्हारे रूप को आँखों में भर लिया हमने
किसीसे और अब आँखें मिला नहीं सकते

हमारा दर्द उन्हें दूसरे कहें तो कहें
हम अपने आप तो होँठों पे ला नहीं सकते

हमें वो आँख दो परदे के पार देख सकें
जो सामने से ये परदा उठा नहीं सकते

सही है, आपने देखा नहीं गुलाब का फूल
कभी हम आपको झूठा बता नहीं सकते
-गुलाब खंडेलवाल


Monday, December 30, 2019

हल्की बर्फ़ में .....पूजा प्रियंवदा

हल्की बर्फ़ में

एक हाथ थामे रखता है

घुमावदार पगडंडियों पर

दिल फिसले तो फिसले

तुम न फिसलो !

****************

उसके होंठ चुनते हैं

मेरे होंठों से

बर्फ़ के ताज़ा फ़ाहे

बर्फ़ गर्म और मीठी

मैंने पहली बार चखी.




Sunday, June 21, 2015

.....चलो प्यार बोएं...कविता विकास

















इक-दूजे के विश्वास बोएं
चलो, कुछ प्यार बोएं

नफरत नें सरहदें बांटी
दरक रही रिश्तों का घाटी
खिड़कियों से अपने झांकते
पराए जब ज़नाज़ा उठाते

मायूस हो क्यों हम रोएं
चलो, कुछ प्यार बोएं

कुछ स्मृतियां अभी है शेष
मज़हबों नहीं था द्वेष
मन से मन का तार मिलाते
लगकर गले से गम भुलाते

दिन सुनहरे हम क्यों खोएं
चलो, कुछ प्यार बोएं

नस्लें हमारी बदल गई
मौजें मातम में ढल गईं
रस्मो-रिवाज़ सब खटक रहे
निरुद्देश्य हम भटक रहे

सब मिल मन का मैल धोएं
चलो, कुछ प्यार बोएं

-कविता विकास

आज....
तबियत भी ठीक है
मन में शान्ति  है
घर में एकान्त भी है
काफी दिनों से अलगाव की
आग में जल भी रही थी...
और आज फिर मन हो आया
सो उसी का प्रतिफल आपको
सादर समर्पित....
कविता विकास की एक कविता...

सादर....
यशोदा दिग्विजय अग्रवाल