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Monday, May 13, 2019

फेक इश्क.....ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना

भटके हुये दिलों के प्रेमी
आत्म मंजिल तक
नहीं पहुंचते हैं... 
फिर गलत इंसान से
धोखा खाकर
सही इंसान
से बदला लेते हैं......
घर की तकलीफ़ें.
चौराहे पर उड़ेलकर
घर को मकां
कर लेते हैं.... 
जीवन में हम इंसा
सिर्फ़ सुख के लिए
बिखरते हैं... 
मेरे युवा भाई-बहनों
माता-पिता पर ना
तुम भार बनो... 
फेक इश्क में
बदनाम ना होकर
जनसेवा से
यशवान बनो
बनो राष्ट्रभक्त
गद्दारों के तुम
काल बनो
आतंक मिटे
इस धरती से
मिलकर कुछ
ऐसे काम करो






Tuesday, March 26, 2019

खूबसूरत घुंध..... आकांक्षा सक्सेना

मेरी अखियों में वो ख्वाब सुनहरा था
मेरे ख्वाब को कोमल पंखुड़ियों ने घेरा था
वदन को उसका आज इंतजार गहरा था
खिंचने लगी बिन डोर उसकी श्वांसों की ओर
मेरी श्वासों ने चुना वो शख्स हीरा था


आज की शाम बेहद नशीली थी
उसकी आहटों की सुंगध सी फैली थी
क्या पता था आज क्या मिलने वाला था
दीदार उसका किसको होने वाला था 
उसकी परछाईं मेरी परछाईं से टकरा गयी 


मेरी हर श्वांस उसकी श्वांस में समा गयी
बाद में वो परछाईं पानी में टकराने लगी
नियत उसकी दिले आईने में नजर आने लगी
उसकी नजरें हृदय के पार न जा सकीं
उसकी सारी बातें हारे दिल से हार गयीं


जाग उठी बेगैरत ख्वाब  से जल्दी
हँस पड़ी हँसते दर्द से आँखें अपनी
चमक में हीरा पर श्वाद जहरीला था
छै घंटे की नींद को एक ख्वाब ने घेरा था
मुझे तो हुआ मात्र एक भ्रम था
वो तो सिर्फ़ एक खूबसूरत धुंध था।