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बेहाल खुद को रोज़ बताया नहीं करो
खुश हो तो दुःख की बात सुनाया नहीं करो
मन तो तुम्हारे फूल से कोमल हैं दोस्तो
सोचों का बोझ इनसे उठाया नहीं करो
कहते हैं, चिट्ठी लिख के बताना जरूरी है
चुपके से दूर गाँव से आया नहीं करो
माना कि भूल जाना कभी होता है मगर
हर बार मेरी बात भुलाया नहीं करो
उड़ जाएगा वो आप ही कुछ देर बैठ कर
यूँ ही कोई परिंदा उड़ाया नहीं करो
हर बच्चा देख के इन्हें डर जाता है हजूर
गुस्से में लाल आँखें दिखाया नहीं करो
अपनी भले ही कसमों को खाया करो मगर
ऐ "प्राण" माँ की कसमों को खाया नहीं करो
-प्राण शर्मा