Showing posts with label शकुन्तला श्रीवास्तव. Show all posts
Showing posts with label शकुन्तला श्रीवास्तव. Show all posts

Sunday, February 18, 2018

उदास गीत कहाँ वादियों ने गाया है.......शकुन्तला श्रीवास्तव

चला है साथ कभी बादलों में आया है
ये चाँद है कि मेरे साथ तेरा साया है।

ये दर्द मेरा है, जो पत्तियों से टपका है
ये रंग तेरा है, फूलों ने जो चुराया है।

ये भीगी शाम, उदासी, धुँआ, धुँआ, मंज़र
उदास गीत कहाँ, वादियों ने गाया है।

ये हौंसले की कमी थी कि सर झुकाये हुए
वो खाली हाथ समन्दर से लौट आया है।

सिसक सिसक के जला है मगर जला तो सही
मेरे चराग़ को आँधी ने आजमाया है।
-शकुन्तला श्रीवास्तव