तुमसे जो मुंह फेरेगा तो किधर जाएगा ।
संभालता रहा खुद को भागती दुनिया में,
गिर गया तो फिर किसको नज़र आएगा ।
बेबसी जब भी पूछती मेरा हाल धीमे से,
सोचता कुछ कहा तो बन ज़हर जाएगा ।
बुत बना रहा वो हादसों को देखकर जब,
कहा लोगो ने इसतरह तो ये मर जाएगा ।
गुनाहों की जो लोग माफ़ी भी नहीं मांगते,



