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Saturday, May 5, 2018

इंतजार की बेताबी............ कुसुम कोठारी

अंधेरे से कर प्रीति
उजाले सब दे दिये 
अब न ढूंढना
उजालो में हमें कभी।

हम मिलेंगे सुरमई
शाम  के   घेरों में 
विरह का आलाप ना छेड़ना
इंतजार की बेताबी में कभी।

नयन बदरी भरे
छलक न जाऐ मायूसी में 
राहों पे निशां ना होंगे
मुड के न देखना कभी।

आहट पर न चौंकना
ना मौजूद होंगे हवाओं मे 
अलविदा भी न कहना
शायद लौट आयें कभी।

-कुसुम कोठारी