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Friday, September 18, 2020

क्या जरूरत थी आपको मेरी....डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी

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दिल्लगी सिर्फ इक बहाना था।
उनका मकसद तो आज़माना था।।

मैं तो लूटा गया उन्हीं  से फिर ।
जिनसे  रिश्ता  बहुत  पुराना था ।।

तोड़  डाला   उसी  ने   दिल   देखो ।
जिसका दिल मे ही आना जाना था ।।

हो  गई  कहकशाँ में जब  साजिश ।
इक सितारे को टूट जाना था ।।

तेरी यादें भी कितनी ज़ालिम थीं ।
रात भर अश्क़ को बहाना था ।।

मौत  के  बाद  आये  हैं जिनको ।
दम निकलने से पहले आना था ।।

चार कंधे नसीब भी न हुए ।
साथ जिसके खड़ा जमाना था ।।

रिन्द प्यासा गया तेरे दर से ।
जाम कुछ तो उसे पिलाना था ।।

क्या जरूरत थी आपको मेरी ।
आसमा सर पे जब उठाना था ।।
-डॉ. नवीन मणि त्रिपाठी

Thursday, July 30, 2020

चाँद रोता रहा ...प्रीती श्री वास्तव

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तेरे दीदार को दिल मचलता रहा।
आँख भरती रही अश्क गिरता रहा।।

तू न आया इन्तजार के बाद भी।
याद आती रही जख्म रिसता रहा।।

दर्द कुछ इस कदर बढ़ गया इश्क में।
चोट लगती रही लब ये हंसता रहा।।

जब भी ख्यालों में आया मेरे तू सनम।
सांस रुकती रही दिल धड़कता रहा।।

नाम लिख लिख के जागा किये रात भर।
रात ढलती रही चाँद रोता रहा।।
- प्रीती श्री वास्तव

Friday, May 29, 2020

जरा बता दो है क्या ...प्रीती श्रीवास्तव

बहुत ग़ज़ल से मुहब्बत वो करतें हैं यारों
उसी में शामों सहर रंग भरतें हैं यारों।।

नजर उठी मेरी उनकी तरफ देखा उन्हें।
वो करते इश्क से दीदार डरतें हैं यारों।।

कोई बता दो मेरी आरजू उन्हें जाकर।
लिखा है खत में कि वो आहें भरतें हैं यारों।।

करूं मैं कैसे यूं दीदार अपने साहिब का।
वो तो नकाब हटातें भी डरतें हैं यारों।।

खुदा ही जाने मुहब्बत में क्या होगा मेरा।
देखा है लोग होकर खाक मरतें हैं यारों।।

जरा बता दो है क्या हाथ की लकीरों में।
ये सच है इश्क तो उन्ही से करतें हैं यारों।।
-प्रीती श्रीवास्तव

Sunday, May 3, 2020

मुहब्बत की ग़ज़ल....प्रीती श्रीवास्तव

खौफ क्या से क्या बना दे आदमी को।
जी रहा डर डर यूं इन्सां जिन्दगी को।।

हर तरफ तूफान चलती आँधियां हैं।
रोक लूं मैं कैसे आँखों की नमी को।।

तू बता मेरे खुदा मेरी खता क्या।
कब तलक जीती रहूं इस बेबसी को।।

याद मुझको आ रही मेरी मुहब्बत।
किस तरह पूरी करूं उसकी कमी को।।

छुप गया वो चाँद सा क्यूं मुस्कुरा के।
मैं छुपाऊं कैसे बढ़ती बेखुदी को।।

मुझको तेरा ही सहारा मेरे मालिक।
रोक इन बेमौत मरती जिन्दगी को।।

कैसे कह दूं अब मुहब्बत की ग़ज़ल मैं।
हर तरफ रोते देखा हर आदमी को।।
-प्रीती श्रीवास्तव

Thursday, June 13, 2019

गूंजती है आवाज कानों में मेरी.... पूनम सिन्हा


रद़ीफ - है मुझे
क़ाफ़िया - ता(आ)

बड़ी सिद्दत से कोई चाहता है मुझे,
मुझसे भी अधिक वो जानता है मुझे।

गूंजती है आवाज कानों में मेरी,
दूर पहाड़ों से कोई पुकारता है मुझे।

मंदिरों में भी घंटे बजाता है हरदम,
जाके रब से सदा माँगता है मुझे।

खुली खिड़कियां जो कभी मेरे घर की,
छुप के पेड़ों से फिर झांकता है मुझे।

प्यार करता हूँ मैं सदियों से तुझे,
अपनी हरकतों से ये जताता है मुझे।

बड़ा मजबूर हूँ मैं, गमों से चूर हूँ मैं,
बहते हुए अश्कों से ये बताता है मुझे।

तड़प उठती हूँ मैं जब भी देखूँ उसे,
क्या है रिश्ता उससे जो सताता है मुझे।

स्वरचित,
-पूनम सिन्हा,
धनबाद,झारखंड।

Sunday, July 23, 2017

आंखो से गिरे है मोती हजारो.....प्रीती श्रीवास्तव

तेरी बेवफाई का शिकवा सनम ! 
मै किसी से कर नही सकती !!

है गुनाहगार तू मेरा कहकर !
साहिब आहें भर नही सकती!!

इल्जाम क्या दूं मै तुझको !
बिन आइना संवर नही सकती !!

की हिमाकत मैने जहां मे सनम !
संगदिलो से जंग लड़ नही सकती !!

अब तो खुदाया का आसरा है !
दर्दे-दिल से अब गुजर नही सकती !!

लिख दूं नाम तेरा हर हरफ पर!
शरारत मै ऐसी कर नही सकती !!

तारीफ क्या करूं उस नाचीज की !
आबरू जिसकी बिगड़ नही सकती !!

आंखो से गिरे है मोती हजारो !
दामन खाली ये भर नही सकती !!

तराना क्या छेड़ू ग़ज़ल मे !
प्रीत बिन मुकम्मल कर नही सकती !!

कुछ नया कर जाऊं तो अच्छा! 
आखिरी दम मगर पढ़ नही सकती !!

सात फेरे सात जन्मों का बंधन!
सात आरजुये मगर निखर नही सकती!!

कर जाये वो वफा तेरे साथ भी! 
उम्मीद न कर ठहर नही सकती !!

तेरी पालकी में चार फूल अच्छे !
तेरे नाम से बगिया बिखर नही सकती !!

-प्रीती श्रीवास्तव..

Sunday, July 16, 2017

सावन का महीना ! ......प्रीती श्रीवास्तव
















हर चेहरे पे निखार आयी है !!
बादल भी बरसे जमकर !
धरा की प्यास बुझायी है !!
बैरी सजनवां परदेश बसे !
याद उनकी बार बार आयी है !!
पाती लिख लिख हैरान हुई !
बागों में भी बहार आयी है !!

चूड़ी खनके हाथों मे !
पायल ने टेर लगायी है !!
पांव महावर लगाके !
हाथों में मेंहदी रचायी है !!
बन-ठन बैठी अंगना !
विरहा ने आग लगायी है !!
सखियां बोले बोली !
मिलकर हंसी उड़ायी है !!

दे दे कोई साथी संदेशवा !
आंख मेरी भर आयी है !!
अबके आना फिर न जाना !
बैरी बलम तुमको दुहाई है !!

- प्रीती श्रीवास्तव
महफिल से....