मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
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डॉ० छेदी साह
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Monday, July 3, 2017
‘मुस्कान’.....डॉ० छेदी साह
मुर्दे में भी डाल देगी जान
उषा की प्रथम किरणों सा
तुम्हारी लम्बी बाहें
संगमरमरी देह
बालों पर
छाई सावन की घटा
हिरणी सी आँखें
देखती हो जब तुम
और होती आँखें चार
तब तुम्हारी मीठी मुस्कान
मुझे लगती है
बड़ी ही कान्तिमान,
-डॉ० छेदी साह
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