मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
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नीरज द्विवेदी
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Sunday, December 31, 2017
मैं पुरूष था....नीरज द्विवेदी
मैं पुरूष था,
नही समझ पाया
स्त्री होने का मर्म..
वो स्त्री थी,
जानती थी..
मेरे पुरूष होने का सच !!
-नीरज द्विवेदी
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