मेरी धरोहर..चुनिन्दा रचनाओं का संग्रह
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रवीन्द्र भारद्वाज
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Friday, December 20, 2019
आदमी अकेले जीना नही चाहता....रवीन्द्र भारद्वाज
आदमी अकेले आता है
और अकेले जाता है
लेकिन अकेले जीना नही चाहता
ना जाने क्यों !
वह मकड़ी का जाल बुनता है रिश्तों का
और खुद ही फँसता जाता है
उस जाल से वह जितना निकलने की कोशिश करता है
उतना ही उलझता जाता है
लेखा परिचय - रवीन्द्र भारद्वाज
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