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Sunday, March 4, 2018

मुखर मेल......अलका गुप्ता

नाट्यकार सा !
जीवन रंग मंच !
शाज मुखौटा !
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मुखर मेल !
सुख-दुखिया खेल !
नकाब पोशी !
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धुनी रमाए !
साधु भए सियार !
छले मुखौटा !
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मांजे चेहरे !
पहन शराफ़त !
डाले ये डाँके !
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साजें तन क्या !
माटी घट ये चोला !
रूह..बुहारें !
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लेने दो साँस !
आत्मा को संस्कार की !
नश्वर तन !
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श्वास ले आत्मा !
अक्षय..अमर वो !
तन ये चोला !

टिप्पणी में एक ताँका__

रंग रंग के !
रूप-कुरूप मास्क !
शुभ-अशुभ !
घाव..घने..या हास !!

जीवंत जिएं विलास !!
-अलका गुप्ता

प्राप्ति स्त्रोत्रः
तस्वीर क्या बोले


Monday, March 13, 2017

कोरे पन्ने......अलका गुप्ता


अन्तः करण कि आवाज थी ...कहाँ ?
कभी ...आत्मा कि अनसुलझी पुकार ||

नित नए... अवसाद समेटे हुए ....
या कभी....विवादित से हुए वो छार ||

डायरी में रहे क्यूँ शेष ये कोरे पन्ने |
सिकुड़े से कुछ गुंजले पीले से कोर ||

थी... क्या व्यथा ...ऐसी ...जो ..
उभर ना सके थे शब्दों के अभिसार ||

मिल न सके ...क्यूँ ....स्मृतियों के ...
बेचैन से लिखित ...........कोई छोर ||

आज जो रुक गए आकर ..आवक ...
कोरे पन्नो पे पलटते अँगुलियों के पोर ||

उकसा रहा मन विकल कोरे इन पन्नों से |
कोरे रह जाने के अनसुलझे से तार ||

आंदोलित करते रहे पुरानी डायरी के ...
अनलिखे...... ये .....शब्द सार ||

या आवाक है हटात ...व्यर्थ रहा ..
जीवन यूँ ही रहा ....कोरा सा ... सार ||

-अलका गुप्ता 

Tuesday, February 28, 2017

खुल जा सिम-सिम........डॉ. सरोज गुप्ता



बाखुशी दी चाबी आप को !
दिखाओ न आँखें बाप को !!

बुझी राख में भी है आग !
धुआं न समझो भाप को !!

हार जीत तो होती रहती है !
बीच में छोड़ा क्यों जाप को !!

करें भरोसा वरदान बरसेंगें !
मिटाओ कुर्सी के अभिशाप को !!

देते हैं शुभकामनाएं आप को !
लगा दो झाड़ू सारे पाप को !!


सभी रचनाये पूर्व प्रकाशित है फेसबुक के समूह "तस्वीर क्या बोले" में https://www.facebook.com/groups/tasvirkyabole/