Monday, August 1, 2022

सज रही बारात होगी ..अमन जी. मिश्रा


जब तुम्हारी बात होगी
वो ग़ज़ल की रात होगी

गुनगुनाए गीत सावन
रिमझिमी बरसात होगी

चाँद छत पे और वो भी
देखिये क्या बात होगी

आज ऐसा लग रहा है
प्रेम की शुरुआत होगी

और शायद ख़्वाब में ही
सज रही बारात होगी
- अमन जी. मिश्रा

Tuesday, July 26, 2022

रुत भीगी सी...अनुपमा अनुश्री


निमिष मात्र में
गगन घट
छलक गए
बिखरे
हल्के रंग
अबीर से सृष्टि के/
सबसे सुखद
जश्न की बारी है।
घन के साथ
घनिष्ठ
बौराई-सी आम्र बौर
झूमकर
फल उठी/
पंछियों के घरौंदे
कुछ और/
घने बस गए
तरुवर की शाखों पर।

लहकी/महकी सी लताएं
लिपट-लिपट
झूम-झूम
देने लगी थाप
बूंदो की ताल पर/
रंगीन कहानियां
बनने लगी
मौसम के राग पर/
नवोन्मेष
पल-पल में
पात-पात पर
-अनुपमा अनुश्री
रसरंग से