Showing posts with label लफ्ज ग्रुप. Show all posts
Showing posts with label लफ्ज ग्रुप. Show all posts

Sunday, May 28, 2017

इंतक़ाम सा सवार था......सौरभ शेखर

यक़ीन मर गया मिरा, गुमान भी नहीं बचा
कहीं किसी ख़याल का निशान भी नहीं बचा

ख़मोशियाँ तमाम ग़र्क़ हो गयीं ख़लाओं में
वो ज़लज़ला था साहिबो बयान भी नहीं बचा.

नदी के सर पे जैसे इंतक़ाम सा सवार था
कि बाँध, फस्ल, पुल बहे, मकान भी नहीं बचा

हुजूम से निकल के बच गया उधर वो आदमी
इधर हुजूम के मैं दरमियान भी नहीं बचा
ज़मीं दरक गयी सुलगती बस्तियों की आग से
ग़ुबार वो उठा कि आसमान भी नहीं बचा

बिखरती-टूटती फ़सील नींव को हिला गयी
कि दाग़ ज़ात पर था, ख़ानदान भी नहीं बचा

तमाम मुश्किलों को हमने नींद में दबा दिया
खुला ये फिर कोई इम्तिहान भी नहीं बचा

- सौरभ शेखर 
09873866653

Thursday, August 4, 2016

नम हुई जाती है तुम्हारी पलकें...........दिनेश नायडू


फिर घटा ज़हन के आकाश में छाई हुई है
मेरे चौखट प कोई नज़्म सी आई हुई है

लौट आईं हैं गए दिन की सदायें मुझमें
भीगती कांपती इक शाम भी आई हुई है

ऐसी शामों में तुझे याद तो आता होगा
ये घडी हमने कभी साथ बिताई हुई है

ये सड़क रात के आगोश में सिमटी हुई आज
मुझसे कहती है क्यों उम्मीद लगाई हुई है

जानता हूँ मैं इस आवाज़ के नक़्शे पूरे
तेरी आहट प कई रोज़ पढ़ाई हुई है

किसलिए नम हुई जाती है तुम्हारी पलकें
ये कहानी तो तुम्हे मैंने सुनाई हुई है

दिनेश नायडू
09303985412

Friday, December 5, 2014

हवाओं के मुक़ाबिल हूँ......पूजा भाटिया



हवाओं के मुक़ाबिल हूँ
चराग़ों की वो महफ़िल हूँ

ख़ुदा जाने कहाँ हूँ मैं
न बाहर हूँ न शामिल हूँ

मिरे कांधे पे वो बिखरे
हैं मौज इक वो मैं साहिल हूँ

ये चादर, सलवटें, तकिया
बताते हैं, मैं ग़ाफ़िल हूँ

मैं जो चाहे वो पा लूं, पर
अभी ख़ुद ही से ग़ाफ़िल हूँ

यहां सच बेसहारा है
सहारा दूँ? मैं बातिल हूँ

उमीदें तुम से रखती हूँ
कहो तो कितनी जाहिल हूँ

जुआ है ज़िन्दगी जैसे
जो जीते उसको हासिल हूँ

रहे ज़द में जुनूँ जिसके
उसी को फिर मैं हासिल हूँ

पूजा भाटिया 08425848550


http://wp.me/p2hxFs-1Sh