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Monday, November 12, 2018

है दीवाली-मिलन में ज़रूरी 'नज़ीर' .....नजीर बनारसी

जखीरा, साहित्य संग्रह | Jakhira, literature Collection | urdu hindi shayari collection
घर की किस्मत जगी घर में आए सजन
ऐसे महके बदन जैसे चंदन का बन 

आज धरती पे है स्वर्ग का बाँकपन 
अप्सराएँ न क्यूँ गाएँ मंगलाचरण 

ज़िंदगी से है हैरान यमराज भी 
आज हर दीप अँधेरे पे है ख़ंदा-ज़न 

उन के क़दमों से फूल और फुल-वारियाँ 
आगमन उन का मधुमास का आगमन 

उस को सब कुछ मिला जिस को वो मिल गए 
वो हैं बे-आस की आस निर्धन के धन 

है दीवाली का त्यौहार जितना शरीफ़ 
शहर की बिजलियाँ उतनी ही बद-चलन 

उन से अच्छे तो माटी के कोरे दिए 
जिन से दहलीज़ रौशन है आँगन चमन 

कौड़ियाँ दाँव की चित पड़ें चाहे पट 
जीत तो उस की है जिस की पड़ जाए बन 

है दीवाली-मिलन में ज़रूरी 'नज़ीर' 
हाथ मिलने से पहले दिलों का मिलन 
- नजीर बनारसी