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Sunday, May 5, 2019

जल ही जीवन है ................सदा

लौट आती देह में . . .
जल ही जीवन है,
नहीं इसके बिना कोई जीवन है,
एक बूंद से,
निश्‍वास होती सांस
लौट आती देह में,
जल ही जीवन है . . . ।
समझो तो सार इसका,
मीन से, जब तक,
जल में रही
सब कुछ इसका था जल,
सांस, आस, विश्‍वास,
न होती एक पल स्थिर,
न आती एक पल उदासी,
चंचलता हर पल रहती,
इसके साथ,
जल ही जीवन है . . . ।
हर ओर था जीवन,
सब ओर था उल्‍लास,
लेकिन जल में रहकर भी,
नहीं बुझी थी प्‍यास,
जीवन था उसका जल,
जल ही जीवन है . . . ।
नहीं रह पाता
कोई भी निर्जल
जल ही जीवन है . . . ।

Saturday, October 15, 2016

भविष्य को संजोते हैं...........सीमा 'सदा'








वक़्त को जरूरत के पंख लगा दो तो
वो और तेजी से भागता है,
ठहरता नहीं जरा भी
सोचती हूँ भागते-भागते
कितना कुछ पीछे छूट गया होगा
पर वो मस्त है
उसके पास अपनी ही व्यस्तता है
गुजरे हुए कल और आने वाले कल के बदले
वह आज में जीने का अभ्यस्त है !!!
जो गुज़र गया है वो
काल के गाल में समा गया
जो आने वाला है
उसकी भी उसे फिक्र नहीं
बस आज और अभी में जीता है
काश समय के इस पाठ को
हम भी पढ़ पाते, सीख पाते इससे
वर्तमान में जीना !!!
....
हम विपरीत नियमावलि को अपनाते हैं
तभी तो वर्तमान में अतीत को जीते हैं
भविष्य को संजोते हैं संवारते हैं
औ' अपने आज को
संघर्षपूर्ण या फिर कड़वा कर लेते हैं !!!!!!
-सीमा 'सदा'