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Wednesday, January 24, 2018

सपने सुहाने नही आते .....मनोज पुरोहित

उठ जाता हूं भोर से पहले सपने सुहाने नही आते ,
अब मुझे स्कूल न जाने वाले बहाने बनाने नही आते ,

कभी पा लेते थे घर से निकलते ही मंजिल को ,
अब मीलों सफर करके भी ठिकाने नही आते ,

मुंह चिढाती है खाली जेब महीने के आखिर में ,
अब बचपन की तरह गुल्लक में पैसे बचाने नही आते ,

यूं तो रखते हैं बहुत से लोग पलको पर मुझे ,
मगर बेमतलब बचपन की तरह गोदी उठाने नही आते ,

माना कि जिम्मेदारियों की बेड़ियों में जकड़ा हूं ,
क्यूं बचपन की तरह छुड़वाने वो दोस्त पुराने नही आते ,

बहला रहा हूं  बस दिल को बच्चों की तरह ,
मैं जानता हूं फिर वापस बीते हुए जमाने नही आते.....!!
-मनोज पुरोहित
ब्रांच मैनेजर 
एस बी आई लाइफ 
नाहन