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Friday, May 18, 2018

ठंडी बयार का झोंका....कुसुम कोठारी

मां को काट दोगे
माना जन्म दाता नहीं है
पर पाला तुम्हें प्यार से
ठंडी छांव दी प्राण वायु दी
फल दिये
पंछिओं को बसेरा दिया
कलरव उनका सुन खुश होते सदा

ठंडी बयार का झोंका
जो लिपटकर उस से आता
अंदर तक एक शीतलता भरता
तेरे पास के सभी प्रदुषण को 
निज मे शोषित करता

हां, काट दो बुड्ढा भी हो गया
रुको!! क्यों काट रहे बताओगे? 
लकडी चहिये हां, तुम्हें भी पेट भरना है
काटो पर एक शर्त है
एक काटने से पहले
कम से कम दस लगाओगे।
ऐसी जगह कि फिर किसी
 विकास की भेट ना चढूं मै
समझ गये तो रखो कुल्हाड़ी

पहले वृक्षारोपण करो
जब वो कोमल सा विकसित होने लगे
मुझे काटो मै अंत अपना भी
तुम पर बलिदान करुं
तुम्हारे और तुम्हारे नन्हों की
आजीविका बनूं

और तुम मेरे नन्हों को संभालना
कल वो तुम्हारे वंशजों को जीवन देगें
आज तुम गर नई पौध लगाओगे
कल तुम्हारे वंशज 
फल ही नही जीवन भी पायेंगे।
-कुसुम कोठारी

एक पेड काटने वालों 
पहले दस पेड़ लगाओ 
फिर हाथ में आरी उठाओ