दो पल की जिंदगी
मुझे कोई उधार दे दे
पतझड़ सी जिंदगी मे
थोडी बहार दे दे।
आने को कोई कह दे
बेचैन-सी मै हो लूं
वो आए या न आए
पर इंतजार दे दे ।
जीने पर चाहूं मरना
मरने पर चाहूं जीना
इस बेकरार दिल को
कोई करार दे दे ।
नाजुक ये नब्ज आंखें
अब बंद होने को है
अर्थी उठाने ही को
दो दो कहार ले ले ।
-अवधेश प्रसाद
