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Friday, December 15, 2017

दो पल की जिंदगी......अवधेश प्रसाद

दो पल की जिंदगी
मुझे कोई उधार दे दे 
पतझड़ सी जिंदगी मे
थोडी बहार दे दे।
आने को कोई कह दे 
बेचैन-सी मै हो लूं 
वो आए या न आए
पर इंतजार दे दे ।
जीने पर चाहूं मरना
मरने पर चाहूं जीना
इस बेकरार दिल को
कोई करार दे दे ।
नाजुक ये नब्ज आंखें 
अब बंद होने को है
अर्थी उठाने ही को 
दो दो कहार ले ले ।
-अवधेश प्रसाद