Saturday, July 18, 2020

रात सावन की...सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय",

रात सावन की
कोयल भी बोली
पपीहा भी बोला
मैं ने नहीं सुनी
तुम्हारी कोयल की पुकार
तुम ने पहचानी क्या
मेरे पपीहे की गुहार?
रात सावन की
मन भावन की
पिय आवन की
कुहू-कुहू
मैं कहाँ-तुम कहाँ-पी कहाँ!
-सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन "अज्ञेय", 

1 comment:

  1. Aapki kavitaye bhut hi manmohak hai
    Maine bhi hal hi me blogger join kiya hai jisme kuch kavitayen likhi hai aapse nivedan hai ki aap unhe pdhe
    https://designerdeekeshsahu.blogspot.com/?m=1

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