Wednesday, July 1, 2020

ज़िंदगी की डोर सिर्फ़ ऊपरवाले के हाथ में है ...सीमा सदा सिंघल


सब की बोलती बंद है इन दिनों,
वक़्त बोल रहा है ..
बड़ी ही ख़ामोशी से
कोई बहस नहीं,
ना ही कोई,
सुनवाई होती है
एक इशारा होता है
और पूरी क़ायनात उस पर
अमल करती है!!!

सब तैयार हैं कमर कसकर,
बादल, बिजली, बरखा
के साथ कुछ ऐसे वायरस भी
जिनका इलाज़,
सिर्फ़ सतर्कता है
जाने किस घड़ी
करादे, वक़्त ये मुनादी.…
ढेर लगा दो लाशों के,
कोई बचना नहीं चाहिये!!
2020 फिर लौट कर
नहीं आएगा,
जो बच गया उसे
ये सबक याद रहेगा,
ज़िंदगी की डोर
सिर्फ़ ऊपरवाले के हाथ में है!!!
© सीमा सदा सिंघल

7 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 01 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत बहुत आभार अनुजा, स्नेहिल शुभकामनाएं

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  3. बहुत बहुत सुंदर रचना

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  4. बिल्कुल सही। बहुत बढ़िया रचना।

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  5. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 2.7.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा -3750 पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी।
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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  6. सुंदर प्रस्तुति

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  7. जिंदगी ने कमर कस ली है कि इस बार मानव को सबक सिखा के रहेगी, सबक जो वह भूलता जा रहा था

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