Saturday, July 4, 2020

अर्द्धांगिनी ..मितु घोष

वो अर्द्धांगिनी हैं तुम्हारी...
अपनी अर्द्धांगिनी को प्यार से देखो ..
उसकी आंखों में झांको ....।

हज़ारों अनकही बातें, हज़ारों रुलाते रातें
प्रेम और अभिमान में भरा...
आँखे बिछाकर ,सारे सपनों को दिल में छूपाती
धैर्य और संयम से इंतजार करती, 
तेरी संगिनी , अर्द्धांगिनी।।

अपनी_चाहत से भी बड़ा है..
कर्त्यव्य, सम्मान, बलिदान..
ईनसनियत, मानवता ।।
जो हर अर्द्धांगिनी बखूबी निभाता..।

देख ज़रा तु महाकाल की तांडव
अपनी पत्नी के लिए व्याकूल हैं भैरव।।
-मितु घोष
साभार कुसुम शुक्ला

4 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 04 जुलाई 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. सुन्दर प्रस्तुति

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  3. बहुत खूबसूरत प्रस्तुति

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