Tuesday, September 24, 2019

कैसे कैसे रंग बदलता आदमी....मीना भारद्वाज

कैसे कैसे रंग बदलता आदमी ।
वक्त के साथ ढलता आदमी ।।

परिवर्तन में ये तो इतना माहिर ।
गिरगिट से होड़ करता आदमी ।।

स्याह रंग की पहनता पैहरन  ।
फिर भी उजली कहता आदमी ।।

आगे बढ़ने की होड़ मे देखो ।
अपनों पे पैर रखता  आदमी ।।

आश्रित सदा अमरबेल सा ।
खुद को बरगद समझता आदमी !!


-- मीना भारद्वाज 

5 comments:

  1. बेहतरीन मीना दी
    सादर

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (25-09-2019) को    "होगा दूर कलंक"  (चर्चा अंक- 3469)     पर भी होगी। --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
     --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'  

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  3. अमरबेल और बरगद के बीच प‍िसता आदमी ... वा‍ह मीना जी क्या खूब ल‍िखा है

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