Tuesday, April 28, 2020

दिल में बस वफा है ...प्रीती श्रीवास्तव

मुहब्बत की ये कैसी दास्तां है।
अश्क आँखों में दिल में बस वफा है।

कभी दीदार किया शामों सहर तक।
कभी दुश्वार मिलना भी हुआ है।।

निभायी हमने सिद्दत से कसमें भी।
मगर फिर भी मिली हमको जफा है।।

बसी है दिल में यारों की मुहब्बत।
मेरे दिल से बस निकलती दुआ है।।

रहें आबाद वो चाहे जहां हो।
खुदा शायद यही अब चाहता है।

हुई मुद्दत उसे देखे हुये तो।
बिना उसके जीना लगता सजा है।।

उसे आवाज देकर भी बुलाया।
बेरूखी से मेरा दिल ही दुखा है।।

देखा जो आसमाँ की ओर यारा।
तो हमको चाँद भी फीका लगा है।।
-प्रीती श्रीवास्तव

4 comments:

  1. वाह!!!!
    लाजवाब गजल।
    हुई मुद्दत उसे देखे हुये तो।
    बिना उसके जीना लगता सजा है।

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज मंगलवार 28 एप्रिल 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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