Wednesday, April 15, 2020

बस यूं ही ...प्रीती श्रीवास्तव

मैनू याद उसकी आती रही सारी रात।
दिल मेरा ही जलाती रही सारी रात।।

वो साला ओड़ कर कम्बल सोता रहा।
मैं तकिये लगाकर रोती रही सारी रात।।

बड़ा निर्दयी बड़ा निष्ठुर था वो हरजाई।
मै अपना चैन शुकूं खोती रही सारी रात।।

सारा दिन खत लिखे मैने उसकी याद में।
ख्वाब खत में संजोती रही सारी रात।।
-प्रीती श्रीवास्तव

7 comments:

  1. सुन्दर रचना

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  2. बहुत सुंदर

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 16.4.2020 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3673 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

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  4. जब पता है कि वह कैसा है तो फिजूल में अश्क बहाना...... ????

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  5. लगी रहें,एक दिन उसे समझ मे आयेगा जरूर।
    फिर इश्क तो निखार देता हैं,बना देता हैं, संवार देता हैं।

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