Wednesday, June 24, 2020

ज़िन्दगी रेत सी हो गई है ...रमीज राजा

सच पूछो तो,
ज़िन्दगी रेत सी हो गई है!
दिन ब दिन फिसलती जा रही है,
जितना समेटने की कोशिश कर रहा हूँ,
उतना ही फिसलती जा रही है |

रौशन होने की चाह मे,
कतरा कतरा मोम सी पिघलती जा रही है |
फिर भी ना जाने अरमान क्यों,
बेखुदी सी मचलती जा रही है |

वक्त ज्यों ज्यों बीत रही है,
त्यों त्यों वजूद मिट जाने की,
डर खलती जा रही है,
उम्र के दोपहर बीतने के बाद समझ आया की,
अरमान शाम की आगोश में ढलती जा रही है |
दिल कह रहा है फिर भी,

बीच लहर में पतवार उम्मीद की थामे डटा रह,
हौसला रख जब तक अंत टलती जा रही है |
सच पूछो तो,
ज़िन्दगी रेत सी हो गई है,
दिन ब दिन फिसलती जा रही है |
-रमीज राजा
अजमेर

4 comments:

  1. वाह क्या कोई तरीका है जो रोक दे समय को।

    ReplyDelete
  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक चर्चा मंच पर चर्चा - 3743 में दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    ReplyDelete
  3. जिंदगी कब किस करवट ले कोई नहीं समझ पाया है
    बहुत अच्छी प्रस्तुति

    ReplyDelete