Sunday, November 24, 2019

मैं आत्म हत्या नहीं करना चाहता हूं.....अरुण साथी

फोटो - साभार- गूगल....

मरना कौन चाहता है? 
किसे अच्छा लगता है 
जीना, बनकर एक लाश। 
करने से पहले आत्महत्या, 
करना पड़ता है संधर्ष, 
खुद से। 
पर पाने से पहले 
रेशमी दुनिया, खौलते पानी में डाल देते है 
कोकुन में बंद जमीर को। 
महत्वाकांक्षा 
परस्थिति 
समय और काल 
के तर्क जाल में उलझ 
आदमी मारकर जमीर को कर लेता है 
आत्महत्या, 
और फिर अपने ही शव को 
कंधे पर उठाये जीता रहता है 
ता उम्र.... 

5 comments:

  1. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज रविवार 24 नवम्बर 2019 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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