Sunday, May 17, 2020

कुछ ही दिनों में ...सालिहा मंसूरी


कुछ ही दिनों में
कितना सब कुछ बदल गया
तुम बदल गए
मैं बदल गई
तेरे मेरे रिश्ते की
परिभाषा ही बदल गई
कितना चाहा था मैंने तुमको
क्या तुम्हें मालूम है
दिल से अपना बनाना
चाहा था मैंने तुमको
क्या तुम्हें मालूम है
पर तुम तो किसी
और के हो लिए
इक बार भी नहीं सोचा
कि मुझ पर क्या बीतेगी
तुम क्यों बदल गए
कैसे बदल गए
जब तुमको पाया तब
ऐसे तो नहीं थे तुम
अच्छे ,भले इंसान थे
मानवता को समझने वाले
रिश्तों को समझने वाले
सबके दर्द को समझने वाले
फिर इतना परिवर्तन कैसे ??

- सालिहा मंसूरी
मूल रचना


3 comments:

  1. बेवफ़ायी की मार्मिक दास्ताँ!

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  2. मानवता को समझने वाले
    रिश्तों को समझने वाले
    सबके दर्द को समझने वाले
    फिर इतना परिवर्तन कैसे ??
    बहुत खूब...

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