Saturday, December 28, 2019

बदलाव प्रकृति का नियम है..…सुमन


जीवन में हर चीज बदल रही है !
नाजुक चीजे कुछ ज्यादा ही,
प्रेम उतनाही नाजुक है 
जितना की गुलाब का फूल !
लेकिन गुलाब जितना नाजुक 
उतना ही आँधी,वर्षा, तेज धूप 
के विरुद्ध शक्तिशाली,संघर्षरत !
जो सुबह-सुबह सूरज की 
सुनहरी किरणों के साथ 
खिलता खिलखिलाता है !
हवा की सरसराती तालपर 
झूमता,डोलता, नाचता  है !
और साँझ होते ही मुरझाने 
लगता है    … 
बदलाव प्रकृति का नियम है !
चीजों को बदलकर नित नविन 
शक्ल में ढाल देती है प्रकृति !
इस प्राकृतिक प्रक्रिया से
प्रेम भी अछूता नहीं होता !
परिस्थितियों की आँधियों 
और वक्त की तेज धूप से 
वो भी मुरझाने लगता है 
बिलकुल इसी गुलाब की 
तरह  ..… !!

6 comments:

  1. प्रेरक और प्रशंसनीय

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  2. बहुत अच्छी प्रस्तुति

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  3. बहुत ही सुंदर...

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  4. यार, आपकी ये कविता पढ़कर लगा जैसे गुलाब और प्रेम दोनों की असलियत आँखों के सामने खड़ी हो गई हो। आपने बहुत खूबसूरती से दिखाया है कि प्यार उतना ही नाजुक है जितना गुलाब, लेकिन साथ ही उतना ही मजबूत भी।

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