कुहासे का स्वेटर

सूरज ने पहना
कुहासे का स्वेटर
और
बच्चों की तरह
हौले-हौले
कदम रख चल पड़ा है
आकाश के पथ पर
सफर में अपने
एक-एक कर खोलेगा वो
स्वेटर के सारे बटन
और
शर्माई सी धूप
गुनगुना उठेगी
खिलखिला उठेगी......
-रश्मि शर्मा
सुन्दर
ReplyDeleteवाह. अद्भुत, बेहद सुंदर रचना 👏 👏
ReplyDeleteवाह, ये कविता पढ़ते ही मन में एक हल्की गर्माहट और चुपचाप मुस्कुराता सूरज की तस्वीर उभर आई। मुझे सबसे मज़ेदार लगा कि सूरज को कुहासे का स्वेटर पहनाया गया है, और वो बच्चों की तरह धीरे-धीरे चल रहा है। हर बटन खोलते हुए उसकी शर्माई धूप की कल्पना सच में बहुत प्यारी लगी।
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