Wednesday, December 25, 2019

अलाव के निकट......सुजाता प्रिय

निकट बगीचे से मंगली चाची,
सुखी लकड़ियाँ बीनकर
लायी।शाम ढली तो
वह घर के आगे,
उसे जोड़कर
अलाव
जलायी।
अलाव देखकर लक्ष्मी दादी,
लाठी टेक लपकती आई।
पारो काकी भी जब
देखी,झट से
आई फेक
रजाई।
चौका-पानी कर गौरी बूआ,
हाथ-पाँव फैला गरमाई।
टोले के बच्चों को
उसने,'पूस की
रात' कथा
सुनाई।
नेहा ,बबली ,चुन्नी , रानी,
गुड़िया लेकर दौड़ीआई।
पप्पु ,मुन्ना राजू चुन्नु ने,
चटपटे चुटकुले
खूब
सुनाई।
कल्लू चाचा बीरन दादा ने,
गाये रामायण की चौपाई।
बूआ, दादी, चाची
मिलकर,भजन
करी बड़ी
सुखदाई।
अलाव की यह सोंधी खुशबू,
हर पीढी के मन में भाई ।
ठिठुरन दूर किया
हम सबका,सर्दी
ने जब हमें
सताई।
एकता का प्रतीक अलाव,
एक सूत्र में सबको
बंधबाई।अलाव
ने सबको गर्मी
देकर,जग
हितकारी
संदेश
सिखाई !!


5 comments:

  1. अलाव
    ने सबको गर्मी
    देकर,जग
    हितकारी
    संदेश
    सिखाई !!
    ...बहुत ही सुन्दर

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  2. बहुत सुन्दर

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  3. "अलाव
    ने सबको गर्मी
    देकर,जग
    हितकारी
    संदेश
    सिखाई"

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  4. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 26.12.2019 को चर्चा मंच पर चर्चा - 3561 में दिया जाएगा । आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी

    धन्यवाद

    दिलबागसिंह विर्क

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