वो गया है बेदिली तो लाज़मी है
आँसुओं से दोस्ती तो लाज़मी है
धूप सूरज से बग़ावत कर रही है
इश्क़ में आवारगी तो लाज़मी है
उस नज़र में देखा ख़ुद को मुद्दतों बाद
आँख में थोड़ी नमी तो लाज़मी है
याँ अदब की सब चितायें जल चुकी हैं
सल्तनत में तीरगी तो लाज़मी है
-मनी यादव
खूबसूरत उम्दा पोस्ट ।
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (04-03-2017) को "होली गयी सिधार" (चर्चा अंक-2899) पर भी होगी।
ReplyDelete--
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
--
हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (04-03-2017) को "होली गयी सिधार" (चर्चा अंक-2899) पर भी होगी।
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चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
सादर...!
डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
याँ अदब की सब चितायें जल चुकी हैं
ReplyDeleteसल्तनत में तीरगी तो लाज़मी है .. Nice expressions Mani.Keep it up