Friday, February 8, 2019

चाँद मिलता न राह में...गौतम राजऋषी

तू जो मुझसे जुदा नहीं होता
मैं ख़ुदा से खफ़ा नहीं होता

ये जो कंधे नहीं तुझे मिलते
तू तो इतना बड़ा नहीं होता

चाँद मिलता न राह में उस रोज
इश्क़ का हादसा नहीं होता

पूछते रहते हाल-चाल अगर
फ़ासला यूं बढ़ा नहीं होता

छेड़ते तुम न गर निगाहों से
मन मेरा मनचला नहीं होता

होती हर शै पे मिल्कियत कैसे
तू मेरा गर हुआ नहीं होता

कहती है माँ, कहूँ मैं सच हरदम
क्या करूँ, हौसला नहीं होता
-गौतम राजऋषि
काव्य धरा

Thursday, February 7, 2019

प्रवासी पक्षियों के डेरे ...पूजा प्रियंवदा

किसी का होना 
बस होना भर ही 
काफी होता है 
हमें भरने के लिए

उस किसी का लौटना 
सज़ा होता है 
प्रवासी पक्षियों के डेरे 
रहते हैं साल भर उदास

बसने और उजड़ने के 
बीच कहीं 
एक भूमध्य रेखा है 
जो कांपती रहती है

उसके हाथ की नरमी से
पिघलने लगा था जो 
दिल का उत्तरी ध्रुव 
अब एक लुप्त ग्लेश्यिर है

वो जो चाहता है 
मैं हो जाऊँ उसकी धूरी 
नहीं जाता मैं एक 
टूटा हुआ उल्कापिंड हूँ

-पूजा प्रियंवदा


Wednesday, February 6, 2019

प्रेम का नहीं छोर'...डॉ. यास्मीन ख़ान

प्रेम का छोर नही रे बन्धु !
खुल खुल पुनः
मन प्रेमालिंगन में
बन्ध जाये,
अंतिम प्रेम लिखे कोई कैसे
प्रेम ही जीने की जब 
आस दिलाये,
प्रेम है केवल प्रेम, और प्रेम ही है
कोई पहला या अंतिम कह
कर रुक नहीं पाये,
जब जब अवसाद घिरे कातर मन
प्रेम शरण फिर-फिर पाये।
प्रेम बढ़े जब हद से ज़्यादा
बावरी बिरहिनि
एक ही लौ लगाये,
सहस्त्र दल कमल
प्रफुल्लित हो शीश में
पिया दरस से
हर संताप मिट जाये।
डॉ.यासमीन ख़ान 

Tuesday, February 5, 2019

गूगल+



सादर अभिवादन
गूगल प्लस 2 अप्रैल से बन्द होने जा रहा है
पाठक वर्ग से निवेदन है कि आप की कम्युनिटी भी बन्द हो जाएगी
अतः आप फेसबुक में नई कम्युनिटी, ग्रुप बना लें और अपने सदस्यें को सूचित करें ताकि वे फेसबुक में अपना एकाउन्ट बना ले तथा आपकी कम्युनिटी में बने रहें....
गूगल + से आए मेल का हिन्दी रूपान्तरण हम नीचे दे रहे हैं
ब्लॉगजगत में इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ रहा है...सारे ब्लॉग यथावत जारी रहेंगे
सूचनार्थ...


दिसंबर 2018 में, हमने उपभोक्ताओं के अपेक्षाओं को पूरा करने वाले एक सफल उत्पाद को बनाए रखने में कम उपयोग और चुनौतियों के कारण अप्रैल 2019 में उपभोक्ताओं के लिए Google+ को बंद करने के अपने निर्णय की घोषणा की। हम आपको Google+ का हिस्सा होने के लिए धन्यवाद देना चाहते हैं और अगले चरण प्रदान करते हैं, जिसमें आपकी फ़ोटो और अन्य सामग्री को डाउनलोड करना शामिल है।

2 अप्रैल को, आपका Google+ खाता और आपके द्वारा बनाए गए किसी भी Google+ पृष्ठ बंद हो जाएंगे और हम उपभोक्ता Google+ खातों से सामग्री हटाना शुरू कर देंगे। आपके एल्बम संग्रह में Google+ से फ़ोटो और वीडियो और आपके Google+ पृष्ठ भी हटा दिए जाएंगे। आप अपनी सामग्री को डाउनलोड और सहेज सकते हैं, बस अप्रैल से पहले ऐसा करना सुनिश्चित करें। ध्यान दें कि Google फ़ोटो में समर्थित फ़ोटो और वीडियो हटाए नहीं जाएंगे।

उपभोक्ता Google+ खातों, Google+ पृष्ठ और एल्बम पुरालेख से सामग्री को हटाने की प्रक्रिया में कुछ महीने लगेंगे, और सामग्री इस समय तक बनी रह सकती है। उदाहरण के लिए, उपयोगकर्ता अभी भी गतिविधि लॉग के माध्यम से अपने Google+ खाते के कुछ हिस्सों को देख सकते हैं और कुछ उपभोक्ता Google+ सामग्री G सुइट उपयोगकर्ताओं को तब तक दिखाई दे सकती है जब तक कि उपभोक्ता Google+ को हटा नहीं दिया जाता।

4 फरवरी की शुरुआत में, आप अब नए Google+ प्रोफ़ाइल, पृष्ठ, समुदाय या ईवेंट नहीं बना पाएंगे।

अधिक विवरण और अपडेट के लिए पूर्ण FAQ देखें और शटडाउन तक ले जाएं।

यदि आप Google+ समुदाय के स्वामी या मॉडरेटर हैं, तो आप अपने Google+ समुदाय के लिए अपना डेटा डाउनलोड और सहेज सकते हैं। मार्च 2019 की शुरुआत में, डाउनलोड के लिए अतिरिक्त डेटा उपलब्ध होगा, जिसमें लेखक, निकाय और सार्वजनिक समुदाय के प्रत्येक समुदाय के पोस्ट के लिए फ़ोटो शामिल हैं। और अधिक जानें

यदि आप Google+ साइन-इन बटन का उपयोग करके साइटों और एप्लिकेशन में साइन इन करते हैं, तो ये बटन आने वाले हफ्तों में काम करना बंद कर देंगे लेकिन कुछ मामलों में Google साइन-इन बटन द्वारा प्रतिस्थापित किया जा सकता है। जब भी आप Google साइन-इन बटन देखेंगे, तब भी आप अपने Google खाते से साइन इन कर पाएंगे। और अधिक जानें

यदि आपने अपनी या अन्य साइटों पर टिप्पणियों के लिए Google+ का उपयोग किया है, तो यह सुविधा 4 फरवरी तक ब्लॉगर और 7 मार्च तक अन्य साइटों से हटा दी जाएगी। सभी साइटों पर आपकी सभी Google+ टिप्पणियां 2 अप्रैल, 2019 से हटा दी जाएंगी। और जानें

यदि आप एक G सूट ग्राहक हैं, तो आपके G Suite खाते के लिए Google+ सक्रिय रहना चाहिए। अधिक जानकारी के लिए अपने जी सूट व्यवस्थापक से संपर्क करें। आप जल्द ही एक नए रूप और नई सुविधाओं की भी उम्मीद कर सकते हैं। और अधिक जानें

यदि आप Google+ API या Google+ साइन-इन का उपयोग करने वाले डेवलपर हैं, तो यह देखने के लिए यहां क्लिक करें कि यह आपको कैसे प्रभावित करेगा।

Google+ टीम में हम सभी से, Google+ को ऐसी विशेष जगह बनाने के लिए धन्यवाद। हम कलाकारों, सामुदायिक बिल्डरों और विचारशील नेताओं के प्रतिभाशाली समूह के लिए आभारी हैं जिन्होंने Google+ को अपना घर बनाया। यह आपके जुनून और समर्पण के बिना समान नहीं होता।


Monday, February 4, 2019

मेरी दुआएँ,सुन....श्वेता सिन्हा

नक़्श आँगन के अजनबी,कहें सदायें, सुन
हब्स रेज़ा-रेज़ा पसरा,सीली हैं हवायें,सुन

धड़कन-फड़कन,आहट,आहें दीद-ए-नमनाक
दिल के अफ़साने में, मिलती हैं यही सज़ाएं सुन

सुन मुझ पे न मरक़ूज कर नज़रें अपनी
ख़ाली हैं एहसास दिल की साएं-साएं,सुन

ना छेड़ पत्थरों में कैद लाल मक़बरे को
फिर जाग उठेंगीं, सोयी हुईं बलायें,सुन

मैं अपनी पलकों से चुन लूँ सारे ग़म तेरे
तू जीस्त-ए-सफ़र में, मेरी पाक दुआएँ,सुन

-श्वेता सिन्हा

नक़्श..चिह्न, हब्स ..घुटन
रेज़ा-रेज़ा..कण-कण, दीद-ए-नमनाक..गीले नेत्र
मरक़ूज-केंद्रित, जीस्त-ज़िंदगी


Sunday, February 3, 2019

कुछ तो हवा सर्द थी.......परवीन शाकिर

कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तेरा ख़याल भी 

दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी 


बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की 

चाँद भी ऐन चेत का उस पे तेरा जमाल भी 


सब से नज़र बचा के वो मुझ को ऐसे देखते 

एक दफ़ा तो रुक गई गर्दिश-ए-माह-ओ-साल भी 


दिल तो चमक सकेगा क्या फिर भी तराश के देख लो 

शीशागरान-ए-शहर के हाथ का ये कमाल भी 


उस को न पा सके थे जब दिल का अजीब हाल था 

अब जो पलट के देखिये बात थी कुछ मुहाल भी 


मेरी तलब था एक शख़्स वो जो नहीं मिला तो फिर 

हाथ दुआ से यूँ गिरा भूल गया सवाल भी 


शाम की नासमझ हवा पूछ रही है इक पता 

मौज-ए-हवा-ए-कू-ए-यार कुछ तो मेरा ख़याल भी


उस के ही बाज़ूओं में और उस को ही सोचते रहे 

जिस्म की ख़्वाहिशों पे थे रूह के और जाल भी 
-परवीन शाकिर

Saturday, February 2, 2019

ख़्यालों में कोई मचल रहा है.........श्वेता सिन्हा

शाख़ से टूटने के पहले
एक पत्ता मचल रहा है।
उड़ता हुआ थका वक्त,
आज फिर से बदल रहा है।

गुजरते सर्द लम्हों की
ख़ामोश शिकायत पर
दिन ने कुछ धूप जमा की है,
साँझ की नम आँगन में
चाँदनी की शामियाने तले
दर्द के शरारों का दखल रहा है।

सहेजकर रखे याद के खज़ानें में
एक-एक कीमती नगीना 
गुलाबी रुमाल में बाँधकर
पिटारे में जो रक्खी थी,
उन महकते ख़तों से निकलकर
ख़्यालों में कोई मचल रहा है।

बड़ी देर से थामकर रखी है
कच्ची सी डोर उम्मीद की
कुछ खोने-पाने के डर से परे
अभिमंत्रित पूजा की ऋचाओं सी,
हृदय के महीन तारों से लिपटा
प्रेम ही प्रेम पवित्र सकल रहा है।

-श्वेता सिन्हा