Sunday, February 19, 2012

हो गई कस्तूरी सांसें........................उर्मिला जैन 'प्रिया'

स्नेह के पंखो पर सवार
फूलों की रेशमी छुवन लिये
महकती महकाती
छोटी छोटी रातें.

फूलों की वासंती बहार
सहेजे कितना प्यार
मन को दुलराती
छोटी छोटी सौगातें.

हरित भूमि पर
दूब थी मखमली
मरुस्थल में फुहारें
तुम्हारे नेह की बातें.

सतरंगी तूलिका,गोधूलि बेला
ऑंखों में भर कर चाहत के रंग
देह बन गई चंदन
हो गई कस्तूरी सांसें.


-----उर्मिला जैन 'प्रिया'

Friday, February 17, 2012

धूप में भीगा मन शब्दों के अर्थ - अनर्थ करे....................विजय वाते

हरे कच्चे इस वन में खोया है पांखी
अनायास ही सोये मन में झांका है पांखी

नीले नीले प्रेमगीत के मुखड़े जैसा है
नभ का टुकड़ा है ये सुख की वर्षा है पांखी

जाने कौन दिशा से आया जाएगा किस ओर
मंद पवन की फुगड़ी है ये गरबा है पांखी

घर सारे वर्षा मे भीगे, देह धर्म भीगे
अपने पंखों के कौतुक में डूबा है पांखी

धूप में भीगा मन शब्दों के अर्थ - अनर्थ करे
भरे गले की देहरी में यूँ अटका है पांखी...

-------विजय वाते
प्रस्तुतिकरणः श्याम सुन्दर सारस्वत

दुनिया से खो गया हूँ तुम्हारे ख़याल में...............बहज़ाद लखनवी


अब है ख़ुशी ख़ुशी में न ग़म है मलाल में
दुनिया से खो गया हूँ तुम्हारे ख़याल में

मुझ को न अपना होश न दुनिया का होश है
मस्त होके बैठा हूँ तुम्हारे ख़याल में

तारों से पूछ लो मेरी रुदाद-ए-ज़िन्दगी
रातों को जागता हूँ तुम्हारे ख़याल में

दुनिया को इल्म क्या है ज़माने को क्या ख़बर
दुनिया भुला चुका हूँ तुम्हारे ख़याल में

दुनिया खड़ी है मुन्तज़िर-ए-नग़्मा-ए-अलम
'बेहज़द' चुप खड़े हैं किसी के ख़याल में...


----बहज़ाद लखनवी

प्रस्तुतिकरणः श्याम सुन्दर सारस्वत

Tuesday, January 24, 2012

अपनी राहें सब भूल गया..........................सत्यम शिवम

मै राह तुम्हारी देखते ही,
अपनी राहें सब भूल गया,
मँजिल भी तो अब तुम ही हो,
तेरे इंतजार के सिवा अब और क्या?

अंतिम साँसों की धुन पर,

ये मन बेचारा बुला रहा,
अब तो बस दिल की थमती धड़कन,
को और ना तुम धड़काओ ना।

इस राह देखते दीवाने की जिद है,
अब कैसे भी तुम आओ ना।

तुम आओ ना,तुम आओ ना......।


..........सत्यम शिवम (मेरे बाद)

दोस्त से दुश्मन भला है............................चरण लाल

दोस्त से दुश्मन भला है
दोस्त से दुश्मन भला है दोस्तों
ये पुराना सिलसिला है दोस्तों

दुश्मनों से न कोई शिकवा रहा
दोस्तों से ही गिला है दोस्तों

हमसे कतराने लगे हैं आजकल
दुश्मनों से दिल मिला है दोस्तों

हमपर जब भी वक्त का थप्पड़ पड़ा
दोस्त का चेहरा खिला है दोस्तों

जो छुरा घोंपा हमारी पीठ में
दोस्त के घर में मिला है दोस्तों

जख्म मेरा और मत उधेडिये
बहुत मुश्किल से सिला है दोस्तों .

"चरण"

Thursday, January 19, 2012

ये अशआर भी है नम...............देवी नागरानी

बहता रहा जो दर्द का सैलाब था न कम
आँखें भी रो रही हैं, ये अशआर भी है नम।

जिस शाख पर खड़ा था वो, उसको ही काटता
नादां न जाने खुद पे ही करता था क्यों सितम।

रिश्तों के नाम जो भी लिखे रेगज़ार पर
कुछ लेके आँधियाँ गई, कुछ तोड़ते हैं दम।

मुरझा गई बहार में, वो बन सकी न फूल
मासूम-सी कली पे ये कितना बड़ा सितम।

रोते हुए-से जशन मनाते हैं लोग क्यों
चेहरे जो उनके देखे तो, असली लगे वो कम।

---------देवी नागरानी

Wednesday, January 4, 2012

अब क्या करना है..........................दीप्ति शर्मा

इत्मिनान से जी लूँ
लिख लूँ कुछ नगमें
जो ज़ज्बात से भरें हों
फिर सोचूँगी की मुझे
अब क्या करना है |

गढ़ लूँ कुछ नये आयाम
सतत बढूँ दीर्घ गूंज से
ले मैं रुख पर नकाब
फिर सोचूँगी की मुझे
अब क्या करना है |

स्मरण कर उन्मुक्त स्वर
स्वछन्द गगन में टहलूं
सहजभाव से स्मृतियों में
कुछ ख्यालों को छुला लूँ
फिर सोचूँगी की मुझे
अब क्या करना है |

महसूस कर लूँ एहसास
तेरे यहाँ आने का
बरस जाये बरखा
सावन भर आये और
तुझसे मिलन हो जाएँ
फिर सोचूँगी की मुझे
अब क्या करना है |
--- दीप्ति शर्मा
अनकही बातें
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