Tuesday, January 26, 2021

काव्य ककहरा ....डॉ. अंशु सिंह


काव्य ककहरा जिससे सीखा
भूल गई उन हाथों को
स्वार्थ सिद्धि के खातिर अपनी
तोड़ दिया सब नातों को
कलम पकड़ना नहीं जानती
शब्द शब्द सिखलाये थे
हर पल हर क्षण साथ निभाकर
अक्षर ज्ञान कराये थे
जब-जब उसने काव्य रचा
वो पल पल साथ निभाये थे
शब्द शब्द को सदा सुधारे
अतुलित नेह दिखाये थे
मान दिया समकक्ष सुता के
गुरु सम ज्ञान सिखाये थे
स्वागत किया बहन सा घर में
सारा फ़र्ज़ निभाये थे
प्रथम बार जब मान वो पाई
गर्व सहित मुसुकाये थे
जिन गीतों में मान मिला था
वो भी वही सिखाये थे
फिर भी छोड़ चली चुपके से
दर्द से अति सकुचाये थे
काश वो हमसे कह कर जाती
हम ही समझ न पाये थे
बहुरूपिया के संग गई वो
कुछ भी न कर पाये थे
कह कर अपना सिक्का खोटा 
बहुत बहुत पछताये थे 

-डॉ. अंशु सिंह 

4 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज मंगलवार 26 जनवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत सुन्दर सृजन। गणतंत्र दिवस की असंख्य शुभकामनाएं।

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