Thursday, January 21, 2021

लड़की और चांद ...ज्याति खरे


चाँद
चुपके से 
खिड़की के रास्ते 
कमरे में
रोज आता है 
लड़की 
अपने करीब आता देख
मुस्कुराती है
देखती है देर तक 
छू लेती है
मन ही मन उसे
चाँद 
लड़की से कुछ कहने का
साहस नहीं जुटा पाता
लड़की 
संकोच की जमीन पर
चुपचाप बैठी रहती है
चाँद और लड़की
युगों युगों से
ऐसे ही मिलते हैं
खिड़की के रास्ते
प्रेम
ऐसा ही खूबसूरत होता है
-"ज्योति खरे " 



9 comments:

  1. संकोच की जमीन पर
    चुपचाप बैठी रहती है
    चाँद और लड़की
    युगों युगों से
    ऐसे ही मिलते हैं
    खिड़की के रास्ते

    मानवीय कर्ण अलंकार से ओतप्रोत सुंदर रचना। बधाई एवं शुभकामनाएँ। सादर।

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन  में" आज गुरुवार 21 जनवरी 2021 को साझा की गई है.........  "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. सुन्दर रचना

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  4. मन्त्रमुग्ध करती रचना - - सुन्दर सृजन।

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  5. मनोरम दृश्य का आभास कराती मनोहारी कृति..

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  6. सुन्दर,मनोरम रचना।
    सादर।

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