Monday, September 7, 2020

पारिजात... रंजना जैन

गिरे धरा पर पुष्प देखकर

मन आया पूछूँ फूलों से

बंद कली से तुम खिलने में

रूप रंग से सजने में

फिर सुगंध  रस भरने में 

जितना समय लगाते हो

उतना हक़ नहीं जीने का

अल्प अवधि रह पाते हो! 

 

फूलों ने की अलग कहानी 

अर्थ नहीं जीवन मनमानी

लाना यदि परिणाम निराला

बनना पड़ता है मतवाला

पीकर सोम मधुर रस अंतर

बन आकार पूर्ण अति सुंदर

सुखानंद की मंशा लेकर

गिर पड़ते झट डाली से

नये पुष्प भर जाने को! 

  

सार यही मानव जीवन का

मोल नहीं लम्बे छोटे का

तत्व यही ज़िंदा होने का

फैला दे जो लघु जीवन में

शिव सुन्दर का शुभ संदेश

महका दे सारे उपवन को

पथ में बिखरें फूल अनेक॥ 

-रंजना जैन

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5 comments:

  1. सार यही मानव जीवन का
    मोल नहीं लम्बे छोटे का
    तत्व यही ज़िंदा होने का
    फैला दे जो लघु जीवन में

    –अद्धभुत प्रस्तुति

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज सोमवार 07 सितंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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