Sunday, September 6, 2020

शिकायत रह गयी अधूरी.....प्रीती श्री वास्तव

इस दिल की चाहत रह गयी अधूरी।
तेरे इश्क की इबादत रह गयी अधूरी।।

मेरे महबूब जरा फिर शरारत न कर।
छुपा छुपी में मुहब्बत रह गयी अधूरी।।

चाँद को तकती रही मैं तो रात भर।
बदली की हिफाजत रह गयी अधूरी।।

गरज उठे जो बादल जमीं के लिये।
मौसम की हिदायत रह गयी अधूरी।।

दिल में जगे जज्बात जो तेरे खातिर।
रूठ जाने की आदत रह गयी अधूरी।।

शिकवा न करना मुझसे मेरी जफा का।
दूर जाने की शिकायत रह गयी अधूरी।।
-प्रीती श्री वास्तव

6 comments:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" सोमवार 07 सितम्बर 2020 को साझा की गयी है.............. पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  2. बहुत सुन्दर

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  3. वाह!!!
    चाँद को तकती रही मैं तो रात भर।
    बदली की हिफाजत रह गयी अधूरी।।
    लाजवाब।

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