Wednesday, September 30, 2020

अकेले खड़े हो ..सुजाता प्रिय

अकेले खड़े हो मुझे तुम बुला लो।

मायुस क्यों हो ,जरा मुस्कुरा लो।


रात है काली और अँधेरा घना है,

तम दूर होगा तू दीपक जला लो।


भरोसा न तोड़ो, मंजिल  मिलेगी,

जो मन में बुने हो सपने सजा लो।


देखो तो कितनी है रंगीन दुनियाँ,

इन रंगों को आ मन में बसा लो।


रूठा न करना कभी भी किसी से,

रूठे हुए को जरा तुम मना लो।


पराये को अपना बनाना  कला है,

अपनों को अपने दिल में बसालो।


बुराई किसी की तुम,मन में लाओ,

अच्छाईयों को भी अपना बना लो।


प्यार सिखाता जो,वह गीत गाओ,

झंकार करता , गजल गुनगुनाओ।

-सुजाता प्रिय 

5 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना
    प्यार सिखाता जो,वह गीत गाओ,

    झंकार करता , गजल गुनगुनाओ।
    ----श्रीराम रॉय

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  2. आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज बुधवार 30 सितंबर 2020 को साझा की गई है.... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 01.10.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

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  4. पराये को अपना बनाना कला है,
    अपनों को अपने दिल में बसालो।

    बहुत सुंदर रचना....

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