Saturday, September 15, 2018

नींद की बातें..... कंचनप्रिया

नींद तुम ये ख़ता नहीं करना
हमें उनसे जुदा नहीं करना
ख़्वाब में भी यक़ीनन वो आये
मिलकर उनसे ये गुफ्तगू करना

वास्ता देना मेरी चाहत का
मेरे खामोश दिल की धड़कन का
मेरे इन्तज़ार के हरेक पल का
हिसाब उनसे रूबरू करना

खामख्वाह बात ना बहुत बढ़ जाये
ख्वाब बदख्वाब में ना बदल जाये
ये गरज मेरी है उनकी नहीं
गोया इसका ख्याल भी करना

चंद अल्फाज मेरे जुस्तजू के 
जज्बेहालात मेरे आरजू के
उनसे एकपल जुदाई गवारा नहीं
जिक्रे ख़ास ये ज़रूर करना !!!
-कंचनप्रिया


6 comments:

  1. बहुत सुन्दर

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  2. बहुत सुंदर रचना। लाजवाब भाव।

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  3. नींद तुम ये ख़ता नहीं करना
    हमें उनसे जुदा नहीं करना

    वाह बहुत सुन्दर

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  4. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (16-09-2018) को "हिन्दी की बिन्दी" (चर्चा अंक-3096) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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