समय खुद को
इतनी जल्दी दोहराएगा
अन्दाजा नहीं था
अभी कुछ दशक
पहले ही तो
छोड़कर गया था
अपने पिता को
आज मुझे
मेरा पुत्र छोड़ कर
गया है
उस समय भी
पिता की
आँखे भर आई होंगी
निश्चित ही
मैंने देखा नहीं था
पलटकर
मैंनें जो फैसला लिया था
वह परम्परा बन जाएगी
अन्दाज़ा ही नहीं था
-उर्मिला निमजे
सौजन्यः मधुरिमा, बुधवार, 9 अक्टूबर, 2013
-उर्मिला निमजे
सौजन्यः मधुरिमा, बुधवार, 9 अक्टूबर, 2013





